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Wednesday, 22 January 2020

भालु के बारे में जानकारी Information About Bear in hindi


Information About Bear in hindi(भालु के बारे में जानकारी)

information about bear in hindi
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नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट में हमने नमस्कार दोस्तों आज के इस पोस्ट में हमने bear के बारे में जानकारी इकट्ठी की है जो आपको बहुत पसंद आएगी बात कहां पाए जाते हैं कितने प्रकार के होते हैं वह सब जानकारी हमने इस पोस्ट में दी गई है तो यह पोस्ट आप पूरा पड़ेंगे ऐसी हम उम्मीद करते हैं bear के बारे में पूरी इंफॉर्मेशन के लिए यह पोस्ट पूरा जरूर पड़ेगा जिससे आपको bear के बारे में पूरी नॉलेज हो जाएगी और आप जान सके एक बात क्या है और कहां रहते हैं

भालु के बारे में हिंदी में हमने पूरी इंफॉर्मेशन दी है तो हिंदी में bear इंफॉर्मेशन के लिए यह पोस्ट पूरा पढ़ना जरूरी है और ऐसे ही अन्य प्राणियों के बारे में हिंदी में इंफॉर्मेशन के लिए आप हमारे ब्लॉक को फॉलो जरूर करें यहां पर हमें ऐसे ही बहुत सारे इंफॉर्मेशन आपके साथ शेयर करते रहते हैं


कंकाल में तब्दील होते भालू


इस तस्वीर में पर्यटकों से गुहार लगाते भालू नजर आ रहे हैं. एक की तो पसलियां भी साफ दिखाई पड़ रही हैं. रिपोर्टों के मुताबिक भालू जान बचाने के लिए अपना ही मल तक खा रहे हैं.

आरोपों का खंडन


तीखी आलोचना के बाद चिड़ियाघर के अधिकारियों को सफाई देनी पड़ी. कंजर्वेशन फाउंडेशन के प्रवक्ता ने कहा कि दुबले पतले होने का मतलब यह नहीं है कि भालू बीमार है. उन्होंने दावा किया भालुओं को पर्याप्त भोजन दिया जा रहा है.

दुनिया भर में बदनामी


भूख से छटपटाते भालुओं की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर एक अभियान भी छिड़ चुका है. अभियान में दो लाख से ज्यादा लोग दस्तखत कर चुके हैं. अभियान के तहत चिड़ियाघर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की मांग की जा रही है.

पहला मामला नहीं


इंडोनेशिया की चिड़ियाघरों में वन्य जीवों की दुर्दशा का यह पहला मामला नहीं है. बीते साल सुमात्रा नस्ल की एक हथिनी यानी की मौत हुई थी. जांच में पता चला कि हथिनी को कई चोटें लगी थीं, जिनका इलाज नहीं किया गया. चिड़ियाघर ने हर बार की तरह तब भी आरोपों का खंडन किया.

सुराबाया में बदत्तर हालत


2010 में सुराबाया के चिड़ियाघर में भी कई जानवरों की मौत हुई. एक जांच के मुताबिक 2006 से 2014 के बीच इंडोनेशिया के चिड़ियाघरों में 1,800 जानवर मारे गए. इनमें एक सुमात्रन टाइगर भी था.

लापरवाही की इंतेहा


30 साल का यह जिराफ जू के अंदर प्लास्टिक खाने से मरा. डॉक्टरों को उसके पेट से 20 किलोग्राम प्लास्टिक मिला. 2014 में एक छोटी से जगह में कैद 45 ड्रैगन आपस में लड़ मरे. एक यूनिवर्सिटी द्वारा किये गए ऑडिट में चिड़ियाघर मैनेजमेंट को खराब प्रबंधन के लिए जिम्मेदार माना गया.

दबाव का असर


विवादों के चलते अगर कहीं सुधार आया तो वह जगह सिर्फ सुराबाया का चिड़ियाघर है. शहर के मेयर के दखल के बाद वहां हालात कुछ बेहतर हुए हैं. लेकिन धूमिल हो चुकी छवि को सुधरने में अभी काफी समय लगेगा.

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