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Tuesday, 7 January 2020

[BEST] moral story in hindi for kids 15+ हींदी कहानीया


Moral story in hindi for kids


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Moral story in hindi for kids
Moral story in hindi for kids



सुगंध और खनखनाहट(Hindi Moral story for kids)




                 एक गरीब मजदूर था। वह खेतो में काम करता था एक दिन शााम को वह अपना काम खत्म करके। घर लौट रहा था रास्ते के किनारे मिठाई की एक दुकान थी। मिठाईयो की मीठी मीठी सुगंध रास्ते भर आ रही थी। इससे मजदूर के मुह में पानी आ गया। वह दुकान के पास गया। कुछ देर वहाँ खड़ा रहा उसके पास थोड़े पैसे थे। पर वे मिठाई खरीदने के लिये काफी नही थे। वह खाली हाथ लौटने लगा तभी उसे दुकनदार की कर्कश आवाज सुनाई दी। "रूको! पैसे तो देते जाओ।" 

पैसे ? काहे के पैसे? मजदूर ने पूछा?
मिठाई के और काहे के! दुकनदार ने कहा,
"पर मैने तो मिठाई खाई नही! उसने जवाब दिया।
"लेकिन तुमने मिठाई की सुगंध तो ली है न!" दुकनदार ने कहा, "सुगंध लेना मिठाई खाने के बराबर है।"

                  बेचारा मजदूर घबरा गया। वहाँ खड़ा एक होशियार आदमी यह सुन रहा था। उसने मजदूर को अपने पास बुलाया उसके कान में फुसफुसाकर कुछ कहा। उस आदमी की बात सुनकर मजदूर का चेहरा खिल उठा वह दुकनदार के पास गया और अपनी जेब के पैसे खनखनाने लगा पैसो की खनखनाहट सुनकर दुकनदार खुश हो गया। चलो निकालो पैसे। मजदूर ने कहा, "पैसे तो मैने चुकता कर दिए" 
दुकनदार ने कहा, "अरे तुमने पैसे कब दिए?"

                 मजदूर ने कहा, "तुमने पैसो की खनखनाहट नही सुनी अगर मिठाई की सुगंध लेना मिठाई खाने के बराबर है। तो पैसो की खनखनाहट सुनना पैसे लेने के बराबर है।" हा हा हा वह गर्व से सर ऊँचा किए कुछ देर वहाँ खड़ा रहा। फिर मुस्कराता हुआ चला गया।


शिक्षा -जैसे को तैसा



View -भेडीया की कहानी





डब्बू और नाई(kids moral story hindi)



              डब्बू नाम का एक छोटा लड़का था। वह हमेशा होशियारी दिखाता था। 

एक दिन उसे नाई से मजाक करने की सूझी वह सुबह सुबह नाई
की दुकान में पहुँचा। शाीशे के सामने कुर्सी पर बैठ गया नाई ने पूछा, "क्या बात है डब्बू?" डब्बू ने शान से कहा, "जरा मेरी दाढ़ी बना दो।"

               नाई को डब्बू की शैतानी समझ में आ गई। उसने कहा, "हाँ जरूर बनाऊँगा। सरकार इसके बाद नाई ने डब्बू के कंधो पर तौलिया लपेट दिया। उसने ब्रश से उसके चेहरे पर झागदार साबुन लगाया फिर वह अपने अन्य काम में लग गया।

                डब्बू ने कुछ देर तक इतंजार किया चेहरे पर साबुन पोते ज्यादा देर तक बैठे रहना। उसके लिए मुश्किल हो गया उसने नाई पर नाराज होते हुए कहा आखिर तुमने मुझे इस तरह क्यों बिठा रखा है।

                यह सुनकर नाई हँस पड़ा। उसने शांति से जवाब दिया इसलिए कि अभी में तुम्हारी दाढ़ी उगने का इंतजार कर रहा हूँ। 

शिक्षा -दूसरे का मजाक उडानेवाला खुद मजाक का पात्र हो जाता है।




View- भुतो की कहानी



गधे की परछाई(Hindi story kids)



                     गर्मियो के दिन थे। तेज धूप में एक यात्री को एक गाँव से दूसरे गाँव जाना था। दोनो गाँव के बीच एक निर्जन मैदान था यात्री ने किराए पर एक गधा ले लिया। गधा आलसी था। वह चलते चलते बार बार रूक जाता था। इसलिए गधे का मालिक उसके पीछे पीछे चल रहा था। जब गधा रूकता तो वह उसे डंडा मारता गधा फिर आगे चलने लगता था।

                    चलते चलते दोपहर हो गई। आराम करने के लिए वे रास्ते में रूक गए वहाँ आस पास कोई छाया नही थी।
इसलिए यात्री गधे की परछाई मे बैठ गया। 

                    गर्मी के कारण गधे का मालिक भी बहुत थक गया था। वह भी गधे की परछाई में बैठना चाहता था। इसलिए उसने यात्री से कहा, "देखो भाई यह गधा मेरा है। इसलिए गधे की परछाई मेरी है। तुमने केवल गधे को किराए पर लिया है उसकी परछाई से हमारा कोई सौदा नही हुआ है। इसलिए मुझे गधे की परछाई में बैठने दो।"

                     यात्री ने कहा, "मैंने पूरे दिन के लिए गधे को किराए पर लिया है।

                   इसलिए पूरे दिन गधे की परछाई का उपयोग करने का भी मेरा ही अधिकार है। तुम गधे से उसकी परछाई को अलग नही कर सकते" 
दोनो आदमी आपस में झगड़ने लगे फिर उनमे मारपीट शुरू हो गई।
इतने में गधा भााग खड़ा हुआ। वह अपने साथ अपनी परछाई भी ले गया।

शिक्षा -छोटी छोटी बातो पर लड़ना अच्छा नही।



 View - बच्चो के लीए कहानी



बादाम किसे मिला(kids story with moral)


                     एक दिन दो लड़के सड़क के किनारे किनारे जा रहे थे। तभी उन्हे जमीन पर गिरा हुआ एक बादाम दिखाई दिया। दोनो उस बादाम को लेने के लिए दौड़ पड़े। बादाम उनमे से एक लड़के के हाथ लगा। दूसरे लड़के ने कहा, "यह बादाम मेरा है। क्योंकि सबसे पहले मैने इसे देखा था।"

                     यह मेरा है। बादाम लेनेवाले लड़के ने कहा, "क्योंकी मैंने इसे उठाया था।" इतने मे वहाँ एक चलाक लंबा सा लड़का आ पहुँचा। 

                      उसने दोनो लड़को से कहा, "बादाम मुझे दो। मैं तुम दोनो का झगड़ा निपटा देता हूँ।" लंबे लड़के ने बादाम ले लिया उसने बदाम को फोड़ डाला। उसके कठोर छिलके के दो टुकड़े कर दिये। छिलके का आधा हिस्सा एक लड़के को देकर उसने कहा, "लो यह आधा भाग तुम्हारा दूसरा भाग दूसरे लड़के के हाथ मे थमाकर बोला और यह भाग तुम्हारा। फिर लंबे लड़के ने बादाम की गिरी मुहँ मे डालते हुए कहा, "यह बाकी बचा हिस्सा मैं खा लेता हूँ। क्योंकी तुम्हारा झगड़ा निपटाने मे मैंने मदद की है।

शिक्षा -दो के झगड़े मे तीसरे का फायदा।




खंडर- हींदी कहानी




मूर्खता का फल(Hindi kids moral story)



                     एक बढ़ई था। एक बार वह लकड़ी के लंबे लट्ठे को आरे से चीर रहा था। उसे इस लट्ठे के दो टुकडे़ करने थे। सामनेवाले पेड़ पर एक बंदर बैठा हुआ था। वह काफी देर से बढ़ई के काम को बडे़, ध्यान से देख रहा था। बढ़ई ने दोपहर का भोजन करने के लिये काम बंद कर दिया। अब तक लट्ठे का केवल आधा ही भाग चीरा जा चुका था। इसलिए उसने लट्ठे के चिरे हुए हिस्से में एक मोटी सी गुल्ली फँसा दी। इसके बाद वह खाना खाने चला गया।

                      बढ़ई के जाने के बाद बंदर पेड़ से कूदकर नीचे आया। वह कुछ देर तक इधर-उधर देखता रहा। उसकी नजर लकड़ी की गुल्ली पर गड़ी हुई थी। वह गुल्ली के पास गया और उसे बड़ी उत्सुकता से देखने लगा। वह अपने दोनों पाँव लट्ठे के दोनों ओर लटकाकर उस पर बैठ गया। इस तरह बैठने से उसकी लंबी पूँछ लकडी के चिरे हुए हिस्से में लटक रही थी। उसने बड़ी उत्सुकता से गुल्ली को हिलाडुला कर देखा फिर वह उसे जोर-जोर से हिलाने लगा। अंत में जोर लगा कर उसने गुल्ली खींच निकाली। ज्योंही गुल्ली निकली की लट्ठे के दोनो चिरे हुए हिस्से आपस में चिपक गये। बंदर की पूँछ उसमे बुरी तरह से फंस गयी। दर्द के मारे बंदर जोर-जोर से चिल्लाने लगा। उसे बढ़ई का डर भी सता रहा था। वह पूँछ निकालने के लिए छटपटाने लगा। उसने जोर लगाकर उछलने की कोशिश की, तो उसकी पूँछ टूट गयी। अब वह बिना पूँछ का हो गया।

शिक्षा -अनजानी चीजो से छेड़छाड़ करना खतरनाक होता है।


दरवाजा खोलो- हीदी स्टोरी




कुत्ते की आदत छूटी(hindi story moral)


                 एक बार दो गायें चारा खाने के लिए गौशाला गईं। वहाँ पहुँचने पर अपनी नाँद में उन्हें एक कुत्ता बैठा हुआ दिखाई दिया। गायों को देखकर कुत्ता जोर-जोर से भौंकने लगा। उसे लगा कि भौंकने से गायें डरकर भाग जाएँगी। 

                उनमें से एक गाय ने कुत्ते से कहा, "देखो भाई, हमें भूख लगी है। हमें घास खा लेने दो। यह हमारा भोजन है। गाय की बातें सुनकर कुत्ता चिढ़ गया। वह और जोर-जोर से भौंकने लगा। बेचारी गायें वापस लौट आईं।

                बाद में एक गाय जाकर एक बैल को बुला लाई। बैल ने कुत्ते से कहा, "अरे भाई, तू तो घास खाता नहीं! यह गायों का चारा है। तू यहाँ से चला जा।"
पर बैल की बात का कुत्ते पर कोई असर नहीं पड़ा। वह जमकर वहीं डटा रहा। यह देखकर बैल को गुस्सा आ गया। वह जोर-जोर डकारने लगा। अपने सींग तानकर वह कुत्ते पर वार करने के लिये तैयार हो गया। कुत्ते ने देखा कि बैल गुस्से में है। इसलिए वह तुरंत दुम दबाकर भाग खड़ा हुआ।

शिक्षा -दूसरे की चीज पर अधिकार जताना अच्छा नही।



अच्छा भुत -कहानी




बाघ की बन आई(Hindi moral stories)


                   एक जंगल मे चार गायें रहती थी। उनमें गाढ़ी मित्रता थी। वे चारों हमेशा साथ-साथ रहती थीं। एक साथ घूमने जाती साथ-साथ चरने जातीं। वे बड़े सुख से रहती थीं। कभी कोई जंगली जानवर उन पर हमला करता, तो वे चारों मिलकर उसका सामना करतीं। और उसे मारकर भगा देतीं।

                   उसी जंगल में एक बाघ भी रहता था। उसकी नजर इन गायों पर थी वह गायों को मार कर खा जाना चाहता था। लेकिन उनकी एकता देखकर उन पर हमला करने की उसकी हिम्मत नही होती थी।

                    एक दिन गायों में आपस में झगड़ा हो गया। वे एक-दूसरे से नाराज हो गईं। उस दिन हर गाय अलग-अलग रास्ते से जंगल में चरनें गई। बाघ तो बहुत दिनों से इसी ताक में बैठा था। उसने एक-एक कर सभी गायों को मार डाला और उन्हे खा गया।

शिक्षा -एकता में ही शक्ति है, फूट से ही विनाश होता है।




सच्ची कहानीया




नकलची कौआ(Hindi story with moral kids)


                     एक पहाड़ की ऊँची चोटी पर गरूड़ रहता था। पहाड़ की तलहटी में एक बड़ा पेड़ था। पेड़ पर एक कौआ अपना घोंसला बनाकर रहता था। एक दिन तलहटी में कुछ भेंडे़ घास चर रही थीं। गरूड़ की नजर एक मेमने पर पड़ी। वह पहाड़ की चोटी से उड़ा। तलहटी में आकर मेमने पर झपट्टा मारा। उसे चंगुल में लेकर उड़ते हुए वह फिर घोंसले में लौट गया। 
गरूड़ का यह पराक्रम देखकर कौए को भी जोश आ गया। उसने सोचा, "यदि गरूड़ ऐसा पराक्रम कर सकता है, तो मैं क्यों नहीं कर सकता?"

                    दूसरे दिन कौए ने भी एक मेमने को तलहटी में चरते हुए देखा। उसने भी उड़ान भरी और आसमान में जितना ऊपर तक जा सकता था, उड़ता चला गया। फिर उसने मेमने को पकड़ने के लिए गरूड़ की तरह जोर से झपट्टा मारा। मगर मेमने तक पहुँचने की बजाय वह एक चट्टान से जा टकराया। उसका सिर फूट गया, चोंच टूट गई और उसके प्राण-पखेरू उड़ गए।

शिक्षा -बिना सोचे-समझे किसी की नकल करने से बुरा हाल होता है।


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बेवकूफ शेर(story for kids)


                      एक जंगल में एक शेर रहता था। एक दिन उसे बहुत भूख लगी। वह गुफा से बाहर आया और किसी जानवर की तलाश करने लगा। उसे दूर एक पेड़ के नीचे खरगोश दिखाई दिया। वह पेड़ की छाया में मजे से खेल रहा था। शेर खरगोश को पकडने के लिये आगे बढ़ा। खरगोश ने शेर को अपनी ओर आते हुए देखा, तो वह जान बचाने के लिये भागने लगा। 

                      शेर ने उसका पीछा किया और लपककर उसे धर दबोचा। शेर ने ज्योंही खरगोश को मारने के लिए पंजा उठाया कि उसकी निगाह हिरन पर पड़ी। उसने सोचा कि इस नन्हे खरगोश से मेरा पेट भर नही सकता। इससे तो हिरन ही अच्छा रहेगा। शेर ने खरगोश को छोड़ दिया। वह हिरन का पीछा करने लगा। हिरन ने शेर को देखा, तो जोर-जोर से छलाँग लगाता हुआ भाग खड़ा हुआ। शेर हिरन को नही पकड़ सका। उसके पीछे भागते-भागते शेर थक कर चूर हो गया। अंत में उसने हिरन का पीछा करना छोड़ दिया। खरगोश भी हाथ से गया और हिरन भी उसे नहीं मिला। अब शेर खरगोश को छोड़ देने के लिये पछताने लगा।

शिक्षा -आधी छोड़ सारी को धाए, आधी रहे न सारी पाए।




स्वार्थी चमगादड़(story moral for kids)


                     बहुत पुरानी बात है। एक बार पशुओं और पक्षियों में झगड़ा हो गया। चमगादड़ों ने इस लड़ाई में किसी का पक्ष नहीं लिया। उन्होंने सोचा, हम पक्षियों की भाँति उड़ते हैं, इसलिए पक्षियों में शामिल हो सकते हैं। मगर पक्षियों की तरह हमारे पंख नही होते हम अंडे़ भी नही देते। इसलिए हम पशु दल में भी शामिल हो सकते हैं। हम पक्षी भी हैं और पशु भी हैं। इसलिए दोनों में से जो पक्ष जीतेगा, उसी में हम मिल जाँएगे। अभी तो हम इस बात का इंतजार करें कि इनमे से कौन जीतता है।

                     पशुओं और पक्षियों में युद्ध शुरू हुआ। एक बार तो ऐसा लगा कि पशु जीत जाएँगे चमगादड़ों ने सोचा, अब शामिल होने का सही वक्त आ गया है। वे पशुओं के दल में शामिल हो गए। कुछ समय बाद पक्षी-दल जीतने लगा। चमगादड़ों को इससे बड़ा दुःख हुआ। अब वे पशुओं को छोड़कर पक्षी-दल में शामिल हो गए।

                    अंत में युद्ध खत्म हुआ। पशुओं और पक्षियों ने आपस में संधि कर ली। वे एक-दूसरे के दोस्त बन गए। दोनों ने चमगादड़ों का बहिष्कार कर दिया। स्वार्थी चमगादड़ अकेले पड़ गए। 
तब चमगादड़ वहाँ से दूर चले गए और अंधेरे कोटरों में छुप गए। तब से वे अंधेरे कोटरो में ही रहते हैं। केवल शाम के धुँधले में ही वे बाहर निकलते हैं। इस समय पक्षी अपने घोंसलों में लौट आते हैं और जंगली जानवर रात में ही अपनी गुफा से बाहर निकलते हैं।

शिक्षा -स्वार्थी मित्र किसी को अच्छा नहीं लगता।




मूर्ख गधा(hindi story for kids)


                     एक कुम्हार था। उसने एक कुत्ता और एक गधा पाल रखा था। कुम्हार के मकान के चारों ओर पत्थर की चहारदीवारी थी। कुत्ता रोज चहारदीवारी के अंदर उसके घर और मिट्टी के बर्तनों की रखवाली करता था। गधा अपने मालिक का वजनदार बोझ ढ़ोने का काम करता। 

                     गधा कुत्ते से ईष्र्या करता था। वह मन-ही-मन सोचता, "कुत्ते का जीवन कितने आराम का है! केवल चहारदीवारी के भीतर इघर-उधर घूमना और किसी अजनबी को देखकर भौंकना।" ऊपर से मालिक उसे प्यार से थपथपाता है। उसे अच्छा खाना खिलाता है। मैं दिन भर भारी बोझ ढ़ोता फिरता हूँ। बदले में कुम्हार मुझे क्या देता है? वह मेरी पीठ पर डंडे लगाता है और खाने के लिये बचा-खुचा घटिया खाना देता है। यह तो वास्तव में घोर अन्याय है।"

                     कुछ दिन बाद गधे को विचार आया, "क्यों न मैं भी मालिक को कुत्ते की तरह खुश करने की कोशिश करूँ? मालिक घर लौटता है, तो कुत्ता उसे खुश करने के लिये कितने प्यार से भौंकता है। पूँछ हिलाते हुए उसके पास पहुँचता है। अपने अगले पैर उठाकर उसके शरीर पर रखता है। मुझे भी इसी तरह करना चाहिए। फिर मालिक मुझे भी प्यार करेगा।"
गधा मन-ही-मन सोच रहा था कि उसी समय उसने मालिक को आते हुए देखा। उसके स्वागत में गधा ढींचू-ढींचू करते रेंकने लगा, खुशी से अपनी पूँछ हिलाने लगा। आगे बढ़कर उसने अपने दोनो पैर कुम्हार की जाँघो पर रख दिए।

                   गधे की इस हरकत से कुम्हार हक्का बक्का रह गया। उसे लगा की गधा पागल हो गया है। उसने मोटा-सा डंडा उठाया और गधे की खूब पिटाई की।
बेचारे गधे ने अपने मालिक को खुश करने की कोशिश की थी, पर बदले में उसे डंडे खाने पडे़।

शिक्षा -किसी से ईष्र्या नहीं करनी चाहिए।




भेडि़या और सारस (Hindi moral  story kids)


                  एक लालची भेडया था। एक दिन वह खूब जल्दी-जल्दी भोजन कर रहा था। भोजन करते-करते उसके गले में एक हड्डी अटक गई। भेडि़ए ने हड्डी बाहर निकालने की बहुत कोशिश की, पर वह हड्डी नही निकाल सका। 

                  वह विचार करने लगा, "अगर हड्डी मेरे गले से बाहर न निकली, तो बहुत मुश्किल होगी। मैं खा पी नहीं सकूँगा और भूख-प्यास से मर जाऊँगा।"

                  नदी के किनारे एक सारस रहता था। भेडि़या भागता-भागता सारस के पास पहुँचा। उसने सारस से कहा, "सारस भाई मेरे गले में एक हड्डी फँस गई है। आपकी गर्दन लंबी है। वह हड्डी तक पहुँच जाएगी। कृपा करके मेरे गले में फँसी हड्डी निकाल दो मैं तुम्हें अच्छा-सा इनाम दूँगा।" 

                   सारस ने कहा, ठीक है! मैं अभी तुम्हारे गले की हड्डी निकाल देता हूँ। भेडि़ये ने अपना जबड़़ा फैलाया। सारस ने फौरन अपनी गर्दन भेडि़ये के गले में डालकर हड्डी बाहर निकाल दी।
अब मेरा ईनाम दो! सारस ने कहा।

                   "इनाम? कैसा इनाम?" भेडि़ये ने कहा, इनाम की बात भूल जाओ। भगवान का शुक्रिया अदा करो कि तुमने अपनी गर्दन मेरे गले में डाली और वह सही-सलामत बाहर चली आयी। इससे बड़़ा इनाम और क्या होगा?

शिक्षा -धूर्त की बातों में कभी नहीं आना चाहिए,
उन्हें एहसान भुलाते देर नहीं लगती।

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hame ummid he ki aapko ye stories pasand aayegi agar aapko ye story pasand ho to please ak comment jarur kare.

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